Thursday, 26 January 2017

मना रहे हैं, आज गणतंत्र!

शीर्षक : मना रहे हैं आज गणतंत्र ! 
रचना तिथि : 26 जनवरी 2017

हम मना रहे हैं ,आज गणतंत्र !
पर क्या हम हो चुके स्वतंत्र 
बुराइयों के बेड़ी में जकड़े हुए 
अंधविश्वास को पकड़े हुए 
दुषित हो रहा, सारा तंत्र 
मना रहे हैं ,आज गणतंत्र !

सलाम कीजिए उनको जो 
सरहद पर लहु बहाते हैं। 
पर देश के प्रहरी को 
देश के लोग झुठलाते हैं। 
वे लोग हैं हवा  जो 
दिये को बुझा,आग लगाते हैं।
चंद कोरे कागज के खातिर, 
चमन को बेच जाते हैं ।
परेशान है हर आदमी की,
कैसा हो?देशप्रेम का मंत्र
मना रहे हैं आज गणतंत्र !

हमें उन पर है ,अभिमान 
जो ऊँचा रखते हैं ईमान 
आओ बनाए,सबसे प्यारा हिन्दुस्तान 
जहाँ तिरंगा बने अपनी शान
हर्षित हो मनाये यह त्योहार 
ताकि शहादत न जाए बेकार 
देशप्रेम का ऐसा गुलशन खिले 
कि अगले दिन ,
तिरंगा सड़कों पर न मिले । 

©ANKUR DUTTA JHA

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