Monday, 9 January 2017

मैं भी कुछ लिखने लगा हूँ ।

शीर्षक:      मैं भी कुछ लिखने लगा हूँ। 
रचना तिथि:      9जनवरी 2017 


कर रहा था मैं इंतजार,
क्या लिखूँ मैं पहली बार
न था मुझे शब्दों का ज्ञान
जैसे तरकश बिना तीर समान
मेरे साहित्य में शब्दों की कमी थी।
पर सूखे रेगिस्तान में कुछ नमी थी।
शब्दों के अंकुर फुट पड़े थे।
और हम वहीं खड़े थे।
अभी अभी साहित्य में जगा हूँ।
मैं भी कुछ लिखने लगा हूँ ।


©ANKUR DUTTA JHA

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