Wednesday, 26 April 2017

एक दिया शहीदों के नाम

शीर्षक:एक दिया शहीदों के नाम
रचना तिथि:      26 अप्रैल 2017 

ऐसे न गुजारो यह शाम
एक दिया शहीदों के नाम
सरहद पर ,जिसने जान गँवाया
रो रही है ,उसकी जाया
भले हो आँखो में आँसु दौड़े
लेकिन हो गये सीने चौड़े
वह कर के गया ऐसा काम
एक दिया शहीदों के नाम
आतंक फैलाती अपनी माया
लड़ने को तैयार वह काया
ड्युटी लगती ,कभी थानो में
कभी बर्फीले रेगिस्तानो में
कहीं कड़कड़ाती ठंडक है,
तो कहीं छलकता घाम
एक दिया शहीदों के नाम
मजहब पर ,क्यों लड़ते यारा 
मजहब से पहले ,देश हमारा
देश है मंदिर ,देश है मस्जिद
सैनिक हमारे, अल्लाह और राम
हो, एक दिया शहीदों के नाम!



©ANKUR DUTTA 

Tuesday, 25 April 2017

अगर हो हौसला!


ठोकरे इंसान को पीना सिखाती है|
अगर हो हौसला,
तो जीना सिखाती है|
Failure, success से चिढ़ी होती है|
अगर हो हौसला,
तो success की सीढ़ी होती है|


©ANKUR DUTTA JHA

खौल रही है यह धरती

शीर्षक : खौल रही है, यह धरती
रचना तिथि :22 अप्रैल 2017


खौल रही है, यह धरती
कुछ बोल रही है, यह धरती
हे आदम! सच कब तलक छिपाओगे
आने वाली गर्मी में, तुम झुलस जाओगे
ठंड से कप कपाओगे,
और जब प्यास लगेगी तुमको
पानी की बूंद न खोज पाओगे
धूप से तपेगी जब, यह धरती
कोई क्रीम काम ना आएगा
बहुत खेल चुके तुम प्रकृति से
अब यह तुम पर कहर ढाएगा
जो धरती थी ,तुम्हारी माता
उसके सीने को ही तुम ने काटा
पुत्र ,कुपुत्र निकल गए तुम
बोलो अब मां क्या करती
कुछ बोल रही है ,यह धरती
खौल रही है, यह धरती
बहुत बना चुके हथियार तुम
अब सजा भुगतने हो, तैयार तुम
वक्त है अब भी संभल जाओ
वरना मानव तू बहुत पछताएगा
हंसती दुनिया, जब होगी वीरान
इंसा, इंसा को न ढूंढ पाएगा


©ANKUR DUTTA JHA

महापर्व छठ

पूरब में फैल रही लाली व्रती देती अर्घ्य की थाली कब दर्शन देंगे ?दिवाकर भास्कर ,दिनकर, रवि, सुधाकर लेकर ईख ,नारियल, हल्दी डाला लेकर ...