पूरब में फैल रही लाली
व्रती देती अर्घ्य की थाली
कब दर्शन देंगे ?दिवाकर
भास्कर ,दिनकर, रवि, सुधाकर
लेकर ईख ,नारियल, हल्दी
डाला लेकर ,चलो जल्दी
गुझिया के क्या !कहने ठाठ
साफ सुथरा तैयार है, घाट
नहाय खाय फिर ,होता खरना
संध्या अर्घ्य और अंत में ,परना
आस्था के मिलते अनेकों रूप
भक्ति का है, अलग स्वरूप
भेदभाव का नहीं है ,नाम
वैश्य शूद्र सबका है ,काम
उदय-अस्त सूर्य को प्रणाम
हर्षित हो उठा ,हमारा ग्राम
©ANKUR DUTTA JHA







