अनुशासन जहाँ ताज बनकर
मस्तक पर सजता है
जहाँ भाषण के बाद भी
ताली न बजता है।
सभ्यता संस्कृति में रचा बसा हर अंग
हम हैं राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ
जो खेल खेल में हमें
भाईचारा का भाव सिखलाता है।
हँसते खेलते भारत का
स्वर्णिम इतिहास बतलाता है।
विविधता को एकता में समेटे भगवा रंग
हम हैं राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ
वीर शिवाजी और भगत की
कहानियाँ सुनाकर
एकता का पाठ पढ़ाते हैं।
जो टुट चुके हैं समाज से
उसे मुख्यधारा में लाते हैं।
हमेशा हैं तत्पर चाहे कच्छ हो या बंग
हम हैं राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ
यही है वो संगठन जो
उज्जवल भविष्य लाएगा
यही है शक्ति वह जो
भारत को विश्वगुरु बनाएगा।
तो आओ साथ चले इसके संग
हम हैं राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ
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