Wednesday, 24 May 2017

पाकिस्तान के बाॅर्डर पर,


Sorry if Anyone hurts..... NOTE:कृपया ♢ के स्थान पर 'द' पढ़े।

पाकिस्तान के बाॅर्डर पर,
हम पा♢कर दिखायेंगे ।
कब्ज वाली दुनिया में,
वीरों में नाम लिखायेंगे ।

जो लोग गैस वाले हैं।
जिसने बहुत खाया है।
पाकिस्तान के बाॅर्डर पर,
पा♢ने में कैसी माया है।

जो लोग हारकर बैठे हैं ।
उम्मीद मारकर बैठे हैं।
हम उनके पिछवाड़े में,
फिर से उत्साह जगायेंगे।

हम उस गांव के बच्चे हैं।
जो पा♢ते बिना कच्छे हैं।
बिना बम बारूद से हम,
पाकिस्तान को उड़ायेंगे।

पाकिस्तान के बाॅर्डर पर,
हम पा♢कर दिखायेंगे ।



Wednesday, 26 April 2017

एक दिया शहीदों के नाम

शीर्षक:एक दिया शहीदों के नाम
रचना तिथि:      26 अप्रैल 2017 

ऐसे न गुजारो यह शाम
एक दिया शहीदों के नाम
सरहद पर ,जिसने जान गँवाया
रो रही है ,उसकी जाया
भले हो आँखो में आँसु दौड़े
लेकिन हो गये सीने चौड़े
वह कर के गया ऐसा काम
एक दिया शहीदों के नाम
आतंक फैलाती अपनी माया
लड़ने को तैयार वह काया
ड्युटी लगती ,कभी थानो में
कभी बर्फीले रेगिस्तानो में
कहीं कड़कड़ाती ठंडक है,
तो कहीं छलकता घाम
एक दिया शहीदों के नाम
मजहब पर ,क्यों लड़ते यारा 
मजहब से पहले ,देश हमारा
देश है मंदिर ,देश है मस्जिद
सैनिक हमारे, अल्लाह और राम
हो, एक दिया शहीदों के नाम!



©ANKUR DUTTA 

Tuesday, 25 April 2017

अगर हो हौसला!


ठोकरे इंसान को पीना सिखाती है|
अगर हो हौसला,
तो जीना सिखाती है|
Failure, success से चिढ़ी होती है|
अगर हो हौसला,
तो success की सीढ़ी होती है|


©ANKUR DUTTA JHA

खौल रही है यह धरती

शीर्षक : खौल रही है, यह धरती
रचना तिथि :22 अप्रैल 2017


खौल रही है, यह धरती
कुछ बोल रही है, यह धरती
हे आदम! सच कब तलक छिपाओगे
आने वाली गर्मी में, तुम झुलस जाओगे
ठंड से कप कपाओगे,
और जब प्यास लगेगी तुमको
पानी की बूंद न खोज पाओगे
धूप से तपेगी जब, यह धरती
कोई क्रीम काम ना आएगा
बहुत खेल चुके तुम प्रकृति से
अब यह तुम पर कहर ढाएगा
जो धरती थी ,तुम्हारी माता
उसके सीने को ही तुम ने काटा
पुत्र ,कुपुत्र निकल गए तुम
बोलो अब मां क्या करती
कुछ बोल रही है ,यह धरती
खौल रही है, यह धरती
बहुत बना चुके हथियार तुम
अब सजा भुगतने हो, तैयार तुम
वक्त है अब भी संभल जाओ
वरना मानव तू बहुत पछताएगा
हंसती दुनिया, जब होगी वीरान
इंसा, इंसा को न ढूंढ पाएगा


©ANKUR DUTTA JHA

Monday, 13 March 2017

होली है, त्योहार

शीर्षक:होली है, त्योहार
रचना तिथि: 13 मार्च 2017

होली है, त्योहार
रंगो के सारोबार का,
छोटों के प्यार का,
बड़ो के सम्मान का,
पिचकारी की शान का,
उड़ते गुलाल अबीरो का,
और स्वादिष्ट खीरो का,
दहीबड़ा और पुआ का,
गरीब की दुआ का,
अपनो संग उल्लास का,
हर किसी के खास का,
तो मनाए,
यह त्योहार बिना किसी हुड़दंग,
ताकि काला न हो कोई रंग,
आपको भी हैप्पी होली,
बनाकर निकले अपनी टोली,
ऐसी हो हमारी ख्वाहिश,
कर दें, रंगो की बारिश !





©ANKUR DUTTA JHA

Thursday, 26 January 2017

मना रहे हैं, आज गणतंत्र!

शीर्षक : मना रहे हैं आज गणतंत्र ! 
रचना तिथि : 26 जनवरी 2017

हम मना रहे हैं ,आज गणतंत्र !
पर क्या हम हो चुके स्वतंत्र 
बुराइयों के बेड़ी में जकड़े हुए 
अंधविश्वास को पकड़े हुए 
दुषित हो रहा, सारा तंत्र 
मना रहे हैं ,आज गणतंत्र !

सलाम कीजिए उनको जो 
सरहद पर लहु बहाते हैं। 
पर देश के प्रहरी को 
देश के लोग झुठलाते हैं। 
वे लोग हैं हवा  जो 
दिये को बुझा,आग लगाते हैं।
चंद कोरे कागज के खातिर, 
चमन को बेच जाते हैं ।
परेशान है हर आदमी की,
कैसा हो?देशप्रेम का मंत्र
मना रहे हैं आज गणतंत्र !

हमें उन पर है ,अभिमान 
जो ऊँचा रखते हैं ईमान 
आओ बनाए,सबसे प्यारा हिन्दुस्तान 
जहाँ तिरंगा बने अपनी शान
हर्षित हो मनाये यह त्योहार 
ताकि शहादत न जाए बेकार 
देशप्रेम का ऐसा गुलशन खिले 
कि अगले दिन ,
तिरंगा सड़कों पर न मिले । 

©ANKUR DUTTA JHA

Tuesday, 10 January 2017

नेता से बचाओ!

शीर्षक : नेता से बचाओ !
रचना तिथि : 13 अगस्त 2016



रघुपति राघव राजा राम
पहले पैसा बाद में काम
खादी पहन समझते महान
नेता बन गए नेटा समान
चाहे कोई घटना हो या खुदकुशी
नेताओं को चाहिए अपनी खुशी
खो चुके हैं,वे इज्जत और मान
महँगाई से भी पक गए कान
चाहे आई कोई सरकार महान
जनता की वे ले लेती जान
आरक्षण ले रहा हमारा प्राण
फेल अफसर बढ़ाते शान
इस आजादी को दुँ क्या नाम
फेयर लवली या झंडु बाम
यह है भारत हमारा महान
इसे नेता से बचाओ,हे भगवान!





©ANKUR DUTTA JHA

महापर्व छठ

पूरब में फैल रही लाली व्रती देती अर्घ्य की थाली कब दर्शन देंगे ?दिवाकर भास्कर ,दिनकर, रवि, सुधाकर लेकर ईख ,नारियल, हल्दी डाला लेकर ...